Wednesday, 15 February 2017

Alian are come


हम भारतीय मन्द बुद्धि के होते है| हमारा दिमाग मानवो की औसत छमता से जाय्दा का है|पर हम उसका इस्तेमाल करना नही जानते |मनुष्य के शरीर क एक मुखय और कमजोर भाग उसका दिमाग है | कमजोर इसलिये कि यह बहुत नाजुक है| जरा सी चोट दिमाग पर असर करती है| हम बन्दर के वन्सज है, या  बन्दर हमारे  पुर्वज् है| बन्दर का  औसत  दिमाग 400ml  का रहता है जबकी मानव का  औसत दिमाग  1350ml तक का यह शायद बन्दर से मानव तक सतत् विकास कि प् क्रिया है| ये विकास मानव ने किये है या इसे किसी शक्ति ने नियत्रित किया है|


  क्या हम ब्रहान्ड मे सिर्फ़ हमारे पृ थ्वी पर ही जीवन है | या शायद हमारी धरती से भी उन्नत सभ्यता इस ब्रहान्ड मे हो | तकनीकी या अन्य छेत् मै वो हमसे आगे हो | क्योकि  ब्रहान्ड मे हज़ारो आकाश्गन्गा तथा अरबो तारे हो|

सारा बाते हमारे वेद पुराणो तथा हमारे अन्य धर्म ग्रन्थो मे समाहित है| बस इसे समझने की जरुरत है|प्राचीन वेद के अनुसार आवाज ही सब कुछ है,आवाज ही ब्रह्म है| जब कुछ नही था शून्य था| एक प्रारम्भिक शब्द ध्वनि उत्पन् हुआ | जो एक महविस्फोट था |

 क्या परग्रहि या उनके यान हमारी धरती पर आते है | आते है तो हमारे रडार के सिग्नल उसे पकड नही पाते | हमारे   पृथ्वी एक चुम्बक् की तरह वय्व्हार् करती है | उतर तथा दक्षिण धुर्व north तथा south pole कि तरह वय्व्हार करते है| जो एटीना की तरह वय्व्हार करती है|इस कारण वह अपनी दिशा मे गातिसिल है| शायद इसके इन pole से  frequency नि कलती हो तथा अलग ग्रहो की  frequency अलग – अलग हो| ये परग्रहि इन्ही सिग्नलो को receive कर उतरते हो| हमारे रडार उन सिग्नलो को नही पकड पाते क्योकि हमारी कोडिग जिस कम्प्यूटर की भाषा मे हुई हो वो English मै हुई होती है| वो शायद उनकी frequency से कमजोर या अलग होती है| हम अगर दुसरी भाषा मे अगर कोडिग कर सिग्नल भेजे या create करे तो शायद हम उनसे सम्पर्क कर सकते है|


किसी दुसरे ग्रहो से परग्रहि आयेगे तो क्या वे हमारा नुकसान करेगे ? वे परग्रहि आयेगे तो मानव को कोइ खतरा नही है वे मानव से संपर्क बनाना मानव कि मदत करना चाहते है| खतरा उन शक्तियो को है जो यहाँ के जीवन चक्र का नियन्त्रण करती है|वे यहाँ के  जीवन चक्र मै दखल दे सकते है, या यहाँ का नियन्त्रण अपने हाथ मे लेना चाहेगे|

हमारे यान उतनी दुर प्रकाश वर्ष तक नही जा सकते|क्योकी हमारी ईधन औसत छ्मता के है|हमारे ईधन का 70% भाग अवशेष के रूप मे तथा 30% भाग ऊर्जा के रूप मे इस्तेमाल होता है| ऐसा  ईधन जिसका 90-95% भाग ऊर्जा के रूप मे इस्तेमाल हो और हम ध्वनि, हवा के घषन या सूर्य या वेसी किसी ग्रहो की उष्मा का इस्तेमाल अगर ऊर्जा के रूप मे करे ये ईधन के साथ यान मे हो| तथा प्रकाश की गति या उससे भी तेज वाले यान | पर हमारी तकनीक उतनी उन्नत नही है|

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   kr Arya.